बिहार में सितंबर में योजनाओं की बारिश ने चुनावी वैतरणी में लहरें पैदा कर दी हैं। लॉकडाउन में सुस्त पड़ी राजनैतिक गतिविधियां अब कोसी और गंगा के कछारों पर उतरने लगी हैं।