आज का शब्द: भगिनी और गोपाल सिंह नेपाली की कविता- तू बन जा हहराती गँगा, मैं झेलम बेहाल बनूँ आज का शब्द: भगिनी और गोपाल सिंह नेपाली की कविता- तू चिंगारी बनकर उड़ री